अज़रबैजान और भारत के बीच कैसे रिश्ते हैं?

अज़रबैजान के बाकू में स्थित भारतीय दूतावास का कहना है कि हाल के सालों में भारत और अज़रबैजान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा है.

दूतावास के अनुसार, भारत और अज़रबैजान के बीच 2005 में द्विपक्षीय व्यापार 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर था वो साल 2023 में बढ़कर 1.435 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.

मौजूदा समय में भारत अज़रबैजान का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. साल 2023 में अज़रबैजान ने भारत को 1.235 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जबकि भारत ने अज़रबैजान को 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया.

भारत और अज़रबैजान के बीच द्विपक्षीय व्यापार के मामले में अज़रबैजान फ़ायदे में हैं.

इसके अलावा साल 2023 में अज़रबैजान में भारत से 1 लाख़ 15 हज़ार से ज़्यादा पर्यटक गए थे. ये साल 2022 की तुलना में दोगुना है.

वही अज़रबैजान में भारतीय समुदाय के लोगों की संख्या डेढ़ हज़ार से ज़्यादा है.

दरअसल, भारत और अज़रबैजान के द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन सहित अन्य चीज़ों की इस कारण भी चर्चा हो रही है क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस ने इस मामले में एक दूसरे से कई सवाल किए हैं.

कांग्रेस ने 14 मई को बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें मालवीय ने कहा था, ”देश तुर्की और अज़रबैजान द्वारा आतंकी राष्ट्र पाकिस्तान को दिए गए समर्थन से क्रोधित है. इन देशों के साथ व्यापार और पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग बढ़ रही है और लोग एकजुटता दिखा रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ख़ुद को लोगों की व्यापक भावना के साथ नहीं जोड़ पा रही है.”

इसके जवाब में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा था, “किसी भी देश के साथ संबंध रखने या नहीं रखने का फ़ैसला सरकार को लेना है, हमें (विपक्ष) नहीं.”

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