अज़रबैजान ने पाकिस्तान के समर्थन में क्या कहा?

अज़रबैजान दक्षिण कॉकेशस क्षेत्र में स्थित है. यह ईरान के पड़ोस में है. सोवियत संघ के विघटन के बाद बने देशों में से अज़रबैजान भी एक था.

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि हम उन सैन्य हमलों की निंदा करते हैं, जिसमें पाकिस्तान में कई नागरिकों की जान गई और कई लोग घायल हुए हैं.

“पाकिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए, हम निर्दोष पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं.”जेएनयू में सेंटर फॉर रशियन एंड एशियन सेंट्रल स्टडीज में प्रोफ़ेसर संजय कुमार पांडे अज़रबैजान के पाकिस्तान के प्रति समर्थन के पीछे अज़रबैजान, पाकिस्तान और तुर्की के आपसी रिश्ते को बताते हैं.

प्रोफ़ेसर संजय पांडे बीबीसी हिंदी से कहते हैं, “अज़रबैजान तुर्की का बेहद क़रीबी है. वहां कहा भी जाता है कि अज़रबैजान और तुर्की ‘वन नेशन, टू स्टेट’ हैं. कभी-कभी तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान के लिए भी ये बात कही जाती है.”

“तुर्की पिछले काफ़ी समय से पाकिस्तान का समर्थक रहा है. रेचेप तैय्यप अर्दोआन और उनकी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) एक तरह से सॉफ्ट इस्लामिज्म़ पर चल रही है. अर्दोआन के प्रभाव बढ़ने के साथ ये बढ़ा है.”

संजय पांडे आगे कहते हैं, “तुर्की की पारंपरिक नीति मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क वाली थी, जिसमें वो सेक्युलरिज़्म का एक बड़ा ही कड़ा वर्ज़न अपनाते थे. उन्होंने धर्म को स्टेट से पूरी तरह दूर रखा और तुर्की को आधुनिक किया, लेकिन 80 साल बाद और इस शताब्दी की शुरुआत के दशक में आम लोगों की प्रतिक्रिया इस नीति के ख़िलाफ़ रही.”

विशेषज्ञों के मुताबिक़ अर्दोआन के शासनकाल के दौरान वहां लोगों का मज़हब को लेकर रुझान बढ़ने लगा और मुस्लिम बहुल देशों के प्रति तुर्की का सॉफ़्ट कॉर्नर यानी नरम रुख़ रहने लगा.

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